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Post Date: May 19, 2025 05:23 pm







IAS, IPS,  IFS क्या है?  देश कैसे चलता है? सिविल सेवा का A to Z, आसान भाषा में (PART-2)


नमस्ते युवा साथियो और होनहार छात्रों! 🙏 आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद! पिछले पार्ट में सिविल सर्विसेज़ के इतिहास पर चर्चा की थी। अब आगे बढ़ते हैं...


 UPSC इसका हिस्सा कैसे बना? (UPSC की कहानी)


1. UPSC की स्थापना कब और कैसे हुई? (The Birth of the Merit System)


UPSC का जन्म भारत में योग्यता (Merit) के आधार पर प्रशासन को चलाने की ज़रूरत से हुआ।




  • शुरुआती विचार (ली कमीशन - 1924): ब्रिटिश काल के दौरान, यह महसूस किया गया कि उच्च सिविल सेवाओं में भारतीयों की भागीदारी बढ़नी चाहिए और यह भर्ती एक निष्पक्ष (Impartial) तरीके से होनी चाहिए। इसी विचार को बल देने के लिए 'ली कमीशन' (Lee Commission) का गठन किया गया, जिसने एक केंद्रीय लोक सेवा आयोग बनाने की सिफारिश की।




  • स्थापना (1926): ली कमीशन की सिफारिशों के आधार पर 1 अक्टूबर 1926 को केंद्रीय लोक सेवा आयोग (Central Public Service Commission - CPSC) की स्थापना की गई।




  • आज़ादी के बाद (1950): संविधान लागू होने के बाद, इस संस्था को संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission - UPSC) नाम दिया गया और इसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ।




    • मानवीय स्पर्श: यह संस्था भारत के नागरिकों के लिए प्रशासन में आने का समान अवसर (Equal Opportunity) लेकर आई। यह वह मंच बना जहाँ एक गाँव का बच्चा भी अपनी प्रतिभा के दम पर देश का DM (डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट) बन सकता है, जबकि पहले यह केवल कुछ एलीट (Elite) लोगों के लिए आरक्षित था।






2. संवैधानिक प्रावधान कौन-से हैं? (The Constitutional Backbone)


UPSC केवल एक सरकारी विभाग नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान से सीधे शक्ति प्राप्त करता है।




  • भाग XIV: संविधान का भाग XIV (अनुच्छेद 308 से 323 तक) संघ और राज्यों के अधीन सेवाओं से संबंधित है।




  • अनुच्छेद 315: यह अनुच्छेद UPSC की स्थापना का मुख्य आधार है।




    • प्रावधान: यह कहता है कि संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) होगा।






  • अनुच्छेद 320: यह आयोग के कार्यों (जैसे परीक्षा आयोजित करना, परामर्श देना) का वर्णन करता है।




  • अनुच्छेद 323: यह कहता है कि आयोग अपने काम की वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपेगा, जिसे बाद में संसद में रखा जाता है।




3. UPSC क्यों इतना महत्वपूर्ण है? (The Guardian of Merit)


UPSC को भारत में 'मेरिट सिस्टम का संरक्षक' (Guardian of the Merit System) कहा जाता है।




  • निष्पक्षता (Impartiality): UPSC एक स्वतंत्र (Independent) संवैधानिक निकाय है। यह सुनिश्चित करता है कि भर्ती प्रक्रिया में राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत पक्षपात न हो।




  • क्षमता (Competence): यह देश के सबसे प्रतिभाशाली (Talented) और सबसे योग्य (Competent) व्यक्तियों को चुनकर प्रशासन में भेजता है।




  • स्थायित्व (Stability): यह सुनिश्चित करता है कि सरकारें बदलें, लेकिन प्रशासन की गुणवत्ता और कार्यक्षमता बनी रहे।




4. UPSC की संरचना (The Structure)


UPSC में कौन-कौन शामिल होते हैं, जो इस विशाल प्रक्रिया को संभालते हैं?




  • संरचना: इसमें एक अध्यक्ष (Chairman) और अन्य सदस्य होते हैं।




  • सदस्यों की नियुक्ति: अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।




  • योग्यता: सदस्यों के पास आमतौर पर 10 वर्ष का सरकारी सेवा का अनुभव होना चाहिए।




  • कार्यकाल और निष्कासन: उनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। उन्हें हटाना आसान नहीं होता और यह केवल राष्ट्रपति द्वारा संविधान में उल्लिखित कठिन प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। यह प्रावधान उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।




5. UPSC के मुख्य कार्य (The Core Functions)


UPSC के मुख्य कार्य केवल परीक्षा लेना नहीं, बल्कि सरकार को परामर्श देना भी है।




  • परीक्षा आयोजित करना (Conducting Exams):




    • Civil Services Examination (CSE): IAS, IPS, IFS (विदेश सेवा), IRS आदि के लिए।




    • NDA, CDS: रक्षा सेवाओं के लिए।




    • IES/ISS: इंजीनियरिंग और सांख्यिकी सेवाओं के लिए।






  • परामर्श कार्य (Advisory Functions):




    • भर्ती के नियम: विभिन्न सेवाओं के लिए भर्ती के नियम बनाने में सरकार को सलाह देना।




    • पदोन्नति और स्थानांतरण: सिविल सेवकों की पदोन्नति (Promotion) और स्थानांतरण (Transfer) से संबंधित मामलों पर सलाह देना।




    • अनुशासनात्मक मामले (Disciplinary Matters): सिविल सेवकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई (जैसे सज़ा या जुर्माना) से संबंधित मामलों पर सरकार को अपनी राय देना।






सिविल सेवाएँ क्यों बनाई गई थीं? (Why were Civil Services created?)


सिविल सेवाओं को बनाने के मुख्य कारण को समझने के लिए, फिर से स्कूल का उदाहरण लेते हैं।


1. कानूनों को लागू करना (To Implement Laws)



  • बात: प्रिंसिपल (सरकार) ने नियम बनाया कि "कल से सभी को ID कार्ड पहनना होगा"

  • ज़रूरत: प्रिंसिपल अकेले हर बच्चे का ID कार्ड चेक नहीं कर सकते। इसके लिए गेट पर एक गार्ड या सुपरवाइज़र चाहिए।

  • देश में: जब संसद कोई कानून बनाती है (जैसे GST या शिक्षा का अधिकार), तो IAS/IPS अधिकारी ही उस कानून को शहरों, गाँवों और हर ज़िले में लागू करवाते हैं।


2. नीतियों को चलाना और लोगों तक लाभ पहुँचाना (To Run Policies and Deliver Benefits)



  • बात: प्रिंसिपल ने तय किया कि "स्कूल में एक नया स्पोर्ट्स डे होगा"

  • ज़रूरत: इस इवेंट को प्लान करने, खिलाड़ियों को चुनने, पैसे खर्च करने और सब कुछ व्यवस्थित करने के लिए किसी जिम्मेदार व्यक्ति की ज़रूरत होती है।

  • देश में: सरकार जो भी योजनाएँ (Schemes) बनाती है (जैसे गरीबों के लिए राशन, किसानों के लिए सब्सिडी), उसे लोगों तक पहुँचाने का काम यही अधिकारी करते हैं।


3. देश को लगातार चलाना (To Run the Country Continuously)



  • बात: स्कूल में प्रिंसिपल बदल गए।

  • ज़रूरत: क्या नए प्रिंसिपल के आते ही स्कूल का पूरा काम रुक जाएगा? नहीं! क्योंकि बाकी सारा स्टाफ (सिविल सेवक) वहीं है, जिन्हें पता है कि फाइलें कहाँ हैं और काम कैसे होता है।

  • देश में: चुनाव हर पाँच साल में होते हैं और सरकारें बदल सकती हैं। लेकिन सिविल सेवक स्थायी होते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि सरकार बदलने पर भी ट्रकों में राशन पहुँचना, रेलवे चलना, और पुलिस का काम कभी न रुके


4. विशेषज्ञता और ज्ञान लाना (To Bring Expertise and Knowledge)



  • बात: स्कूल में साइंस लैब के लिए नया सामान खरीदना है।

  • ज़रूरत: प्रिंसिपल को केमिस्ट्री की ज़्यादा जानकारी नहीं है। उन्हें एक ऐसे व्यक्ति (सिविल सेवक) की ज़रूरत है जो साइंस में एक्सपर्ट हो और जानता हो कि सबसे अच्छा सामान क्या है।

  • देश में: सिविल सेवा में ऐसे लोग आते हैं जो इंजीनियरिंग, इकोनॉमिक्स, लॉ या मैनेजमेंट में बहुत पढ़े-लिखे होते हैं। वे अपने ज्ञान का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करते हैं।




अपना ध्यान रखें - स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है


नियमित अध्ययन - छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं


सकारात्मक सोच - हर दिन नया उत्साह


संतुलित जीवन - पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास


📚 तैयार रहिए... अगला पार्ट और भी रोचक होगा!


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